August 26, 2026

उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू को लेकर अलर्ट, 40 मामले सामने आए; 5 मरीजों की मौत

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देहरादून: उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। प्रदेश में अब तक 40 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है, जिनमें अकेले 28 मामले देहरादून से सामने आए हैं। इनमें से 27 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं, जबकि अन्य मरीजों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है। अब तक 5 मौतें भी रिपोर्ट हुई हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार मृतकों में अन्य गंभीर बीमारियां यानी को-मॉर्बिडिटी भी थी।

अस्पतालों को अलर्ट, आइसोलेशन बेड और दवाओं की व्यवस्था

स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के अस्पतालों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अस्पतालों में आइसोलेशन बेड चिह्नित करने, फ्लू के मरीजों के लिए जरूरी व्यवस्थाएं करने और पर्याप्त दवाइयां, मास्क, सैनिटाइजर व पीपीई किट उपलब्ध रखने को कहा गया है। आवश्यकता के अनुसार चिकित्सा सामग्री की खरीद भी की जा रही है।

बुजुर्गों और गंभीर बीमारी वाले लोगों को विशेष सावधानी

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक फिलहाल सामने आ रहे अधिकांश मामले हल्के हैं और घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारी या को-मॉर्बिडिटी से जूझ रहे लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

मास्क और स्वच्छता को बनाया बचाव का हथियार

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनने, सर्दी-जुकाम या बुखार जैसे लक्षण होने पर घर पर रहने और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है। खांसते या छींकते समय रुमाल अथवा टिश्यू का इस्तेमाल करने, खुले में न थूकने और हाथों को नियमित रूप से सैनिटाइज करने की सलाह दी गई है।

सीएमओ ने कहा- सतर्क रहें, अफवाहों पर ध्यान न दें

देहरादून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज शर्मा ने कहा कि कोरोना काल के दौरान अपनाई गई सावधानियां स्वाइन फ्लू से बचाव में भी प्रभावी हैं। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि किसी तरह की अफवाह या पैनिक की स्थिति पैदा न करें। जांच की सुविधा बढ़ने से सामान्य सर्दी-जुकाम और बुखार के मरीजों की भी जांच हो रही है, जिससे संक्रमित मरीजों की पहचान पहले हो रही है।

स्वास्थ्य विभाग का संदेश साफ है—सावधानी बरतें, लक्षणों को नजरअंदाज न करें और बिना वजह घबराने से बचें।