टिहरी गढ़वाल: पहाड़ों में खेती को लाभकारी रोजगार बनाना आसान नहीं है। पानी की कमी, जंगली जानवरों से फसल को नुकसान, बाजार की चुनौती और सीमित संसाधनों के कारण कई लोग खेती से दूरी बना रहे हैं। ऐसे समय में नरेंद्रनगर क्षेत्र के गजा गौसारी गांव निवासी रिटायर्ड नायब सूबेदार मान सिंह चौहान ने कीवी की खेती के जरिए एक मिसाल कायम की है। महज चार पौधों से शुरू हुआ उनका प्रयास आज एक सफल कीवी उद्यम का रूप ले चुका है। पिछले सीजन में उन्हें करीब 50 हजार रुपये की आय हुई और उनके माध्यम से 2 से 3 लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।

सेना से सेवानिवृत्ति के बाद खेती को बनाया मिशन
मान सिंह चौहान ने सेना में करीब 26 वर्षों तक सेवा की और वर्ष 2005 में ऑनरी नायब सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने पहाड़ में रहकर कुछ अलग करने का निर्णय लिया। वर्ष 2014 में उन्होंने पारंपरिक खेती के बजाय कम जमीन में बेहतर आमदनी देने वाली फसल की तलाश शुरू की और कीवी की खेती को चुना।
चार पौधों से शुरू हुआ कीवी का सफर
मान सिंह ने शुरुआत में अपने खेत में सिर्फ चार कीवी के पौधे लगाए। शुरुआती दौर में पौधों की देखभाल, उत्पादन और बाजार से जुड़ी कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी। खेती के तौर-तरीकों को समझने और अनुभव हासिल करने के साथ उन्होंने धीरे-धीरे अपने बागान का विस्तार किया।
मेहनत से बदली खेती की तस्वीर
पर्वतीय क्षेत्रों में खेती के सामने मौसम, सिंचाई और जंगली जानवरों से फसल बचाने जैसी कई चुनौतियां रहती हैं। इसके बावजूद मान सिंह ने कीवी उत्पादन को आगे बढ़ाया। उन्होंने बताया कि उत्पादन हर साल अलग हो सकता है, लेकिन पिछले सीजन अक्टूबर से दिसंबर के बीच उन्हें करीब 50 हजार रुपये की आमदनी हुई। इसके साथ ही खेती के काम में 2 से 3 लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।
आधुनिक खेती अपनाने पर जोर
मान सिंह चौहान का कहना है कि खेती में सफलता के लिए केवल जमीन होना पर्याप्त नहीं है। किसानों को नई तकनीक सीखने, पौधों की सही देखभाल करने और बाजार की मांग को समझने की जरूरत है। उनका मानना है कि पहाड़ों में पारंपरिक खेती के साथ फल उत्पादन और आधुनिक कृषि को अपनाकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहकर भी अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है।
कीवी बना पहाड़ में स्वरोजगार का विकल्प
मान सिंह चौहान की कहानी उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में फल उत्पादन की संभावनाओं को सामने लाती है। अगर किसानों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक, सिंचाई की सुविधा और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो कीवी जैसे उच्च मूल्य वाले फल पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। चार पौधों से शुरू हुआ मान सिंह का सफर अब पहाड़ के युवाओं और किसानों के लिए नई राह दिखा रहा है।

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