August 29, 2026

दून अस्पताल में नवजात बदलने का आरोप, परिजनों ने मांगा डीएनए टेस्ट; स्वास्थ्य मंत्री ने दिए जांच के आदेश

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देहरादून। दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में एक परिवार ने अस्पताल कर्मचारियों पर नवजात बच्चा बदलने का गंभीर आरोप लगाया है। परिजनों का दावा है कि प्रसव के बाद उन्हें लड़के की जगह लड़की सौंप दी गई। मामले को लेकर परिजनों ने जांच और डीएनए परीक्षण की मांग की है। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए चिकित्सा शिक्षा निदेशक को जांच के निर्देश दिए हैं।

प्रसव के बाद बच्चे को लेकर उठे सवाल

परिजन सुमित कुमार के अनुसार, उनकी पत्नी का गर्भावस्था के दौरान दून अस्पताल में उपचार चल रहा था। प्रसव का समय नजदीक आने पर उन्हें 22 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिजनों का कहना है कि 24 अगस्त को डॉक्टरों ने सामान्य प्रसव संभव न होने की बात कहते हुए सिजेरियन डिलीवरी कराने का निर्णय लिया।

परिवार का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। ऑपरेशन के बाद नवजात को मां को भी तत्काल नहीं दिखाया गया। परिजनों के मुताबिक, उन्हें दिए गए दस्तावेज में नवजात का जेंडर मेल दर्ज था, जबकि बाद में उन्हें लड़की सौंपी गई।

सीसीटीवी फुटेज और डीएनए जांच की मांग

परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से मामले की स्थिति स्पष्ट करने के लिए सीसीटीवी फुटेज दिखाने और नवजात का डीएनए परीक्षण कराने की मांग की। उनका कहना है कि शिकायत के बावजूद उन्हें अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

मामला शनिवार को उस समय सामने आया जब स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल दून अस्पताल के निरीक्षण के लिए पहुंचे। परिजनों ने मंत्री के सामने अपनी शिकायत रखते हुए डीएनए जांच की मांग की।

स्वास्थ्य मंत्री ने दिए जांच के निर्देश

स्वास्थ्य मंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए चिकित्सा शिक्षा निदेशक को पूरे प्रकरण की जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मामले में किसी भी तरह का भ्रम है तो उसे दूर किया जाना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर डीएनए परीक्षण कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मंत्री ने कहा कि गलतफहमी से भी अस्पताल की छवि प्रभावित हो सकती है, इसलिए जांच के माध्यम से यह स्पष्ट होना चाहिए कि मामला केवल भ्रम का है या वास्तव में कोई अनियमितता हुई है।

जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल मामले की जांच शुरू होने के बाद परिजनों की निगाहें रिपोर्ट पर टिकी हैं। डीएनए परीक्षण और उपलब्ध रिकॉर्ड व साक्ष्यों की जांच के बाद ही नवजात को लेकर लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की जांच के निष्कर्ष के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होने की उम्मीद है।