सजा सुनते ही रो पड़े दोनों दोषी, मुस्कान ने अधिवक्ता से मिलने की लगाई गुहार; जेल में बढ़ाई गई निगरानी
बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत की ओर से पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद दोनों की जेल में मनोदशा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेशी के दौरान सजा का ऐलान होते ही दोनों रोने लगे। जेल अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें संभाला। वहीं, साहिल ने वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा से कहा, “जिंदगी बर्बाद हो गई… अब जान बचेगी या नहीं, कुछ भरोसा नहीं।”
सजा के बाद जेल प्रशासन ने दोनों की सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी है। उनकी बैरकों पर विशेष नजर रखी जा रही है और सीसीटीवी कैमरों के जरिए भी निगरानी की जा रही है। जेल सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सजा सुनाए जाने के बाद से दोनों सदमे में हैं और बैरक में अन्य बंदियों से बातचीत नहीं कर रहे हैं।
मुस्कान ने अधिवक्ता से मिलने की लगाई गुहार
बैरक में लौटते समय मुस्कान ने जेल अधीक्षक से अपनी अधिवक्ता रेखा जैन से मुलाकात कराने की गुहार लगाई। उसने कहा कि उसे हाईकोर्ट में अपनी पैरवी करानी है और अधिवक्ता से बातचीत करना चाहती है। मुस्कान ने अपनी दो बेटियों के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, मुस्कान ने उनसे कहा कि उसकी अधिवक्ता से संपर्क कराया जाए, ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया पर चर्चा हो सके। जेल अधीक्षक ने उसे जेल मैनुअल के नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी।
हाईकोर्ट में अपील का विकल्प खुला
जिला अदालत से मृत्युदंड की सजा मिलने के बाद अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, दोषियों के पास फैसले को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय का विकल्प मौजूद है। इसके बाद कानून के तहत उपलब्ध परिस्थितियों में सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जा सकता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता पवन प्रधान के मुताबिक, सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जा सकती है। यदि दोषियों के पास अपनी ओर से अधिवक्ता नियुक्त करने के पर्याप्त साधन नहीं हैं, तो विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से कानूनी सहायता उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान भी है। मृत्युदंड के मामलों में आगे की प्रक्रिया संबंधित अदालतों के आदेश और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार आगे बढ़ेगी।
मामले में पैरवी कर रहीं अधिवक्ता रेखा जैन के हवाले से बताया गया है कि फैसले के बाद हाईकोर्ट में अपील की जाएगी। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय में मामले की समीक्षा कानूनी प्रक्रिया के तहत होगी।
22 गवाहों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर दोषी करार
सौरभ राजपूत हत्याकांड ने मेरठ ही नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा बटोरी थी। जिला एवं सत्र न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों के बयान और डिजिटल साक्ष्य पेश किए गए। दिए गए विवरण के अनुसार, 30 सितंबर 2026 को अदालत ने 22 गवाहों के बयानों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया था। इसके बाद बुधवार को दोनों को मृत्युदंड सुनाया गया।
फैसला सुनाते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने कानून की सर्वोच्चता का उल्लेख किया। सजा के ऐलान के बाद अदालत परिसर में मौजूद लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। हालांकि, मृत्युदंड के फैसले के बाद भी मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रह सकती है।
नशीली दवाओं से जुड़ा पहलू भी आया सामने
मामले से जुड़े विवरण में खैरनगर स्थित उषा मेडिकल स्टोर से नशीली दवाएं खरीदे जाने का भी उल्लेख है। बताया गया है कि सौरभ को दवाएं दिए जाने के बाद उनकी हत्या की गई थी। इस संबंध में मेडिकल स्टोर के मालिक अमित जोशी को पुलिस ने गवाह बनाया था और अदालत में उनकी गवाही भी हुई थी।
फैसले के बाद अमित जोशी ने इसे उचित बताते हुए कहा कि इस तरह के अपराधों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। मामले में गवाहों की भूमिका और अदालत के सामने रखे गए साक्ष्य सुनवाई का अहम हिस्सा रहे।
सोशल मीडिया पर फैसले को लेकर चर्चा
मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर भी सौरभ राजपूत हत्याकांड को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई यूजर्स ने फैसले का समर्थन किया, जबकि कुछ लोगों ने वैवाहिक विवादों के समाधान के लिए कानूनी रास्ता अपनाने की जरूरत पर जोर दिया। मामले को लेकर मेरठ, नीला ड्रम और सौरभ हत्याकांड जैसे शब्दों की चर्चा भी बढ़ गई।
सोशल मीडिया पर आई प्रतिक्रियाएं व्यक्तिगत विचार हैं और उन्हें पूरे समाज की राय नहीं माना जा सकता। इस घटना ने वैवाहिक रिश्तों में विवाद, अलगाव और विवादों के कानूनी समाधान जैसे मुद्दों पर भी बहस छेड़ी है।
विशेषज्ञों ने विवाद की स्थिति में कानूनी रास्ता अपनाने पर दिया जोर
मनोचिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों ने रिश्तों में बढ़ते तनाव और विवादों को गंभीरता से लेने की जरूरत बताई है। विशेषज्ञों के अनुसार, पति-पत्नी के बीच मतभेद होने पर संवाद, परामर्श और जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता लेना महत्वपूर्ण है। यदि साथ रहना संभव न हो, तो हिंसा या अपराध का रास्ता चुनने के बजाय कानून के तहत अलग होने का विकल्प अपनाया जाना चाहिए।
सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत के फैसले के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। हाईकोर्ट में अपील और अन्य न्यायिक विकल्पों पर होने वाली कार्रवाई से मामले की अगली दिशा तय होगी।

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