देहरादून। उत्तराखंड में जल संरक्षण, कृषि विकास और ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से प्रदेशभर में दो माह तक राज्य स्तरीय ‘जल-कृषि समृद्धि अभियान’ चलाया जाएगा। जलागम मंत्री राम सिंह कैड़ा ने बताया कि अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जलागम विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाई जाएगी। इसके साथ ही लोगों को जल एवं कृषि संसाधनों के संरक्षण के लिए जागरूक किया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि अभियान के दौरान प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में बीज वितरण, जरूरतमंद लाभार्थियों को सहायता, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के साथ गोष्ठियां तथा जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित आजीविका को प्रोत्साहित करने के साथ जल संरक्षण के प्रयासों को भी गति दी जाएगी।
अभियान में उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना, ग्रीन एजी (जैफ-6) परियोजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के जलागम घटक 2.0 और स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवनेशन अथॉरिटी (सारा) की विभिन्न गतिविधियों को शामिल किया गया है। इन योजनाओं के माध्यम से किसानों और ग्रामीणों को कृषि की आधुनिक तकनीकों तथा जल संरक्षण के उपायों की जानकारी दी जाएगी।
अभियान की शुरुआत पिथौरागढ़ और हरिद्वार से की जा चुकी है। पिथौरागढ़ के यक्षवती नदी क्षेत्र में नदी उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें जनजागरूकता गतिविधियों, दीपदान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को नदियों के संरक्षण का संदेश दिया गया। वहीं, हरिद्वार की पीली पड़ाव ग्राम पंचायत में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों को बारानी कृषि परियोजना के तहत धान की सीधी बुवाई (डीएसआर), गोबर गैस संयंत्र और अन्य कृषि गतिविधियों की जानकारी दी गई।
जलागम विभाग के इस अभियान का उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक ग्रामीणों तक पहुंचाना और जल एवं कृषि संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में जनभागीदारी सुनिश्चित करना है। दो माह तक चलने वाले इस अभियान के जरिए गांवों में जल संरक्षण, टिकाऊ खेती और ग्रामीण विकास से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

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