देहरादून। पौड़ी जिले के खांड्यूसैंण में गुलदार के हमले में चार साल की बच्ची की मौत के बाद वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ हुई मारपीट का मामला तूल पकड़ने लगा है। घटना के विरोध में भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के अधिकारियों समेत वन विभाग के विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने नाराजगी जताई है। संगठनों ने पौड़ी के डीएफओ महातिम यादव के समर्थन में उतरते हुए दुर्व्यवहार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं, सहायक वन कर्मचारी संघ ने कार्रवाई न होने पर कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है।
दरअसल, पौड़ी जिला मुख्यालय के नजदीक खांड्यूसैंण क्षेत्र में गुलदार के हमले में चार साल की मासूम बच्ची की मौत हो गई थी। घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। गुस्साए ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए पौड़ी-देवप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगा दिया। इस दौरान मौके पर पहुंचे डीएफओ महातिम यादव और वन विभाग की टीम के साथ कथित तौर पर हाथापाई और अभद्रता की गई। घटना के बाद से वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में नाराजगी है।
मामले में पुलिस ने संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दूसरी ओर, भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के संगठन ने भी घटना की निंदा करते हुए डीएफओ महातिम यादव को समर्थन दिया है। संगठन ने पत्र जारी कर अधिकारियों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर नाराजगी जताई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
सहायक वन कर्मचारी संघ ने भी घटना को निंदनीय बताते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग उठाई है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष स्वरूप चंद्र रमोला ने कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। संगठन इसकी कड़ी निंदा करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मारपीट और अभद्रता करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो कर्मचारी कार्य बहिष्कार करने के लिए मजबूर होंगे।
वहीं, वन मंत्री सुबोध उनियाल ने भी डीएफओ और वन विभाग की टीम के साथ हुई हाथापाई को दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने सामाजिक और राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से इस तरह का घटनाक्रम किया। वन विभाग मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं के दौरान लोगों की सुरक्षा के लिए काम करता है। ऐसे में आम नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारियों को समझना चाहिए। किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है।
वन मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन विरोध के नाम पर सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मारपीट करना उचित नहीं है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार चुनौती बनी हुई हैं। वन्यजीवों के हमलों में जनहानि के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश देखने को मिलता है। खांड्यूसैंण की घटना ने एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने और वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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