September 12, 2026

उत्तराखंड के जंगलों में धधक रही आग: 350 से ज्यादा घटनाएं, सैकड़ों हेक्टेयर वन संपदा खाक

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देहरादून:

उत्तराखंड के जंगलों में भड़की वनाग्नि की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। मौजूदा फायर सीजन के समाप्त होने में अभी वक्त बाकी है, लेकिन इससे पहले ही राज्य के जंगलों को भारी नुकसान पहुंच चुका है। प्रदेश में अब तक वनाग्नि की 350 से अधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनकी चपेट में आने से सैकड़ों हेक्टेयर में फैली बहुमूल्य वन संपदा जलकर खाक हो गई है। हालात यह हैं कि राज्य के कई वन प्रभाग अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

गढ़वाल और कुमाऊं में भारी नुकसान

वन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस बार गढ़वाल क्षेत्र आग से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। गढ़वाल रीजन में अब तक वनाग्नि की 285 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिससे 241 हेक्टेयर से ज्यादा का वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। वहीं, कुमाऊं रीजन में 74 आग की घटनाओं के कारण करीब 64 हेक्टेयर वन क्षेत्र को क्षति पहुंची है। इसके अलावा, राज्य के वन्यजीव क्षेत्रों (Wildlife Zones) में भी 35 बार आग धधकी है, जिसके चलते 25 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र की जैव विविधता (Biodiversity) को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

ये इलाके बने हैं ‘हॉटस्पॉट’

मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि नियंत्रण) सुशांत पटनायक ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बताया कि बदरीनाथ, पिथौरागढ़, पौड़ी और रुद्रप्रयाग वन प्रभाग फिलहाल वनाग्नि के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील (Highly Sensitive) बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि विभाग पूरी तरह मुस्तैद है और कहीं भी आग लगने की सूचना मिलते ही विभागीय टीमें तुरंत मौके पर पहुंचकर उसे बुझाने के काम में जुट जा रही हैं।

जंगलों को इस तबाही से बचाने के लिए अब हर किसी की नजरें आसमान की ओर टिकी हैं। मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में राज्य के कई हिस्सों में बारिश की संभावना जताई है। अगर उम्मीद के मुताबिक बारिश होती है, तो धधकते जंगलों को शांत करने और वनाग्नि की घटनाओं पर काबू पाने में काफी हद तक मदद मिलेगी।