विश्वव्यापी होगा हरिद्वार महाकुंभ 2027: अखाड़ा परिषद के साथ जापान से आए संतों ने लिया तैयारियों का जायजा, निर्माण कार्यों से दिखे संतुष्ट
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक महायोग ‘कुंभ मेले’ की तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं। इस बार कुंभ की गूंज न केवल देश में बल्कि सात समंदर पार विदेशों में भी सुनाई दे रही है। इसी क्रम में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी के नेतृत्व में साधु-संतों और मेला प्रशासन के अधिकारियों ने कुंभ क्षेत्र, नए बन रहे गंगा घाटों और अन्य निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस निरीक्षण दल में विशेष रूप से जापान से आए सनातन धर्म के संत और साध्वी भी शामिल रहे।
विभागीय अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, हरिद्वार में आगामी 14 जनवरी से 20 अप्रैल 2027 तक कुंभ मेला आयोजित किया जाएगा।
मेला प्रशासन का रोडमैप: दिव्य और सुव्यवस्थित होगा महाकुंभ
निरीक्षण के दौरान अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती ने संतों को विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि:
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घाटों का विस्तार: श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए नए और आधुनिक घाट बनाए जा रहे हैं।
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मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर: सड़क संपर्क, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और स्वच्छता व्यवस्था को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
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आधुनिक तकनीक: भीड़ नियंत्रण, पेयजल और विद्युत आपूर्ति के लिए इस बार आधुनिक प्रबंधन प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा।
“कुंभ दिव्यता और सुरक्षा के नए मानक स्थापित करेगा” – महंत रविंद्र पुरी
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने मेला प्रशासन के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि, “हरिद्वार में चल रहे अभूतपूर्व विकास कार्यों और नए घाटों के निर्माण से स्नान पर्वों के दौरान भीड़ प्रबंधन में बड़ी मदद मिलेगी। हमें पूरा विश्वास है कि यह महाकुंभ दिव्यता, भव्यता और सुरक्षा के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।”
जापान से आएंगे बड़ी संख्या में श्रद्धालु: विदेशी संतों में भारी उत्साह
इस बार के कुंभ में विदेशी श्रद्धालुओं का आकर्षण का केंद्र जापान रहने वाला है। निरीक्षण के दौरान जापान से आए संतों ने अपने विचार साझा किए:
स्वामी आदित्यानंद गिरि (महामंडलेश्वर, निरंजनी अखाड़ा – जापान): “जापान के टोयामा प्रांत के त्सुरुगी पर्वतीय क्षेत्र में लोग भारतीय संस्कृति, योग और सनातन दर्शन के प्रति तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। हरिद्वार में चल रही तैयारियां अत्यंत प्रभावशाली हैं और आगामी कुंभ में मेरे साथ जापान से बड़ी संख्या में शिष्य और श्रद्धालु भारत आएंगे।”
साध्वी योगमाता सत्य प्रेम गिरि (जापान): “गंगा तट पर आयोजित होने वाला कुंभ पूरी मानवता को जोड़ने वाला एक वैश्विक आध्यात्मिक महोत्सव है। अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के लोग यहाँ आत्मिक शांति के लिए जुटते हैं। कुंभ में सम्मिलित होना हमारे लिए सौभाग्य की बात है।”
कुंभ मेले को लेकर संतों और प्रशासन के बीच बना यह बेहतर समन्वय यह साफ दर्शाता है कि आगामी महाकुंभ 2027 वैश्विक पटल पर भारत की आध्यात्मिक चेतना का एक नया और भव्य स्वरूप पेश करने जा रहा है।

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