नई दिल्ली।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े फंड और उसके संस्थापक अभिजीत दिपके के परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर नया विवाद सामने आया है। सूरत के एक आरटीआई कार्यकर्ता ने महाराष्ट्र सरकार, भारत निर्वाचन आयोग और केंद्रीय जीएसटी विभाग को पत्र भेजकर मामले की जांच की मांग की है।
आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने आरोप लगाया है कि अभिजीत दिपके के पिता भगवानराव दिपके महाराष्ट्र सरकार के एमआईडीसी में जूनियर इंजीनियर के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनका कहना है कि सीमित वेतन के बावजूद उन्होंने अपने बेटे को अमेरिका के बोस्टन विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा दिलाई, ऐसे में उनकी आय और संपत्ति की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
अमित तिवारी ने यह भी दावा किया कि यदि आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की गई है तो संबंधित एजेंसियों को इसकी जांच करनी चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
इसके अलावा उन्होंने निर्वाचन आयोग को भेजे गए पत्र में कहा है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) यदि राजनीतिक गतिविधियां संचालित कर रही है, तो यह स्पष्ट किया जाए कि क्या उसका पंजीकरण जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत राजनीतिक दल के रूप में हुआ है। यदि ऐसा नहीं है, तो उसके नाम पर जुटाए जा रहे धन और गतिविधियों की जांच कराई जानी चाहिए।
आरटीआई कार्यकर्ता ने केंद्रीय जीएसटी विभाग से भी अनुरोध किया है कि वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा CJP प्रदर्शनकारियों की कानूनी सहायता के लिए घोषित एक करोड़ रुपये के फंड से जुड़े कर (GST) प्रावधानों की भी जांच की जाए।
गौरतलब है कि कपिल सिब्बल ने हाल ही में नीट पेपर लीक मामले से जुड़े प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए फंड में एक करोड़ रुपये का योगदान देने की घोषणा की थी।
अमित तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान अभिजीत दिपके द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके परिवार के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं, जिसके संबंध में उन्होंने संबंधित एजेंसियों को अलग से शिकायत भी भेजी है।
फिलहाल इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और मामले में किसी जांच एजेंसी द्वारा निष्कर्ष भी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

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