देहरादून:
देवभूमि उत्तराखंड में होली का पर्व पहाड़ से लेकर मैदान तक पूरे उल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही शहरों और गांवों में रंगों की बौछार शुरू हो गई। कहीं पारंपरिक होली गीतों की मधुर धुन सुनाई दी तो कहीं डीजे की बीट पर युवा थिरकते नजर आए। गली-गली अबीर-गुलाल उड़ता दिखा और घरों से आती ताजी गुजिया व पकवानों की खुशबू ने माहौल को और भी खास बना दिया।

परमार्थ निकेतन में फूलों की होली
ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में श्रद्धालुओं और संतों ने भक्ति रस के साथ होली मनाई। वहीं हरिद्वार में योग गुरु बाबा रामदेव ने फूलों की होली खेलकर प्रेम और सौहार्द का संदेश दिया।

ढोल-दमाऊं की थाप पर झूमे होल्यार
कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों में होल्यारों की टीमें ढोल-दमाऊं के साथ घर-घर पहुंचीं। लोगों ने एक-दूसरे को रंग लगाकर गले मिल शुभकामनाएं दीं। बैठकी होली में बुजुर्गों ने पारंपरिक रागों का आनंद लिया, जबकि युवाओं ने आधुनिक संगीत पर जमकर उत्सव मनाया। बच्चों में खास उत्साह देखने को मिला—रंग-बिरंगी टी-शर्ट और पिचकारी के साथ वे सुबह से सड़कों पर नजर आए।
राजनीतिक गलियारों में भी दिखी रौनक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत कई मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों ने कार्यकर्ताओं और आमजन के साथ होली खेली और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने रंगोत्सव की बधाई देते हुए कहा कि होली आपसी प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का संदेश देती है। उन्होंने प्रदेशवासियों से देवभूमि को एकता और सौहार्द के रंगों से सराबोर करने का आह्वान किया।
मसूरी में सैलानियों संग जश्न
‘पहाड़ों की रानी’ मसूरी में भी सैलानियों और स्थानीय लोगों ने जमकर होली खेली। होटल, बाजार और पर्यटन स्थलों पर रंगों की धूम रही।
इस तरह पूरे उत्तराखंड में होली का पर्व रंग, रस और रिश्तों की मिठास के साथ मनाया गया—हर चेहरा रंगों से सजा और हर दिल खुशियों से भरा नजर आया।

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