देहरादून:
NEET-UG 2025 में MBBS में दाखिले के इच्छुक दिव्यांग (PwBD) छात्रों के लिए मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब दिव्यांगता प्रमाण पत्र केवल MCC द्वारा निर्धारित 16 मान्यता प्राप्त केंद्रों से ही बनवाना अनिवार्य होगा। यह नया सर्टिफिकेट PwBD आरक्षण कोटे के तहत प्रवेश के लिए आवश्यक होगा।
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के ‘ओम राठौड़ बनाम भारत संघ’ केस में दिए गए निर्णय और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। इसका उद्देश्य दिव्यांगता के मूल्यांकन में एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
UDID कार्ड जरूरी:
प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अभ्यर्थियों के पास भारत सरकार द्वारा जारी मान्य UDID (यूनिक डिसेबिलिटी आइडेंटिफिकेशन) कार्ड होना आवश्यक है। केवल पीले रंग या उससे ऊपर की श्रेणी वाले कार्ड धारकों को ही PwBD कोटे के अंतर्गत पात्र माना जाएगा।
NMC ने भी बदला मूल्यांकन ढांचा:
NMC ने पुराने दिशानिर्देशों को हटाकर नया वर्कफोर्स-बेस्ड मूल्यांकन सिस्टम लागू किया है। यह 2016 के ‘दिव्यांगता अधिकार कानून’ और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के मार्च 2024 में जारी निर्देशों पर आधारित है।
प्रवेश की प्रक्रिया होगी पारदर्शी:
MCC ने स्पष्ट किया है कि यह कदम इसलिए जरूरी है ताकि PwBD छात्रों को आरक्षण का लाभ सही तरीके से मिल सके और फर्जी प्रमाण पत्रों पर रोक लगाई जा सके।
उम्मीदवार MCC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर 16 मान्यता प्राप्त सर्टिफिकेट सेंटर्स की सूची देख सकते हैं और समय पर प्रमाण पत्र बनवा सकते हैं। बिना मान्य सर्टिफिकेट के कोई भी अभ्यर्थी PwBD कोटे में काउंसलिंग के लिए पात्र नहीं माना जाएगा।

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