उत्तराखंड सरकार ने राज्य में ग्लेशियर लेक्स के अध्ययन और प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (WIHG) को ग्लेशियर लेक के अध्ययन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में नामित किया है। यह कदम राज्य में आपदा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने और उनसे निपटने की रणनीति को और मजबूत करेगा।
वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी हिमालयी क्षेत्र में भूगर्भीय संरचना, हिमनद, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े अनुसंधान में एक अग्रणी संस्थान है। संस्थान की विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ अब उत्तराखंड में ग्लेशियर लेक्स के वैज्ञानिक अध्ययन और निगरानी में लिया जाएगा।
राज्य सरकार के इस निर्णय से ग्लेशियर लेक्स से उत्पन्न संभावित खतरों की समय रहते पहचान, जोखिम आकलन और प्रभावी प्रबंधन संभव हो सकेगा। इससे ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) जैसी आपदाओं से निपटने में भी मदद मिलेगी, जो पर्वतीय क्षेत्रों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
नोडल एजेंसी के रूप में वाडिया इंस्टीट्यूट ग्लेशियर लेक्स के अध्ययन के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेगा और राज्य सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करेगा। इससे न केवल आपदा प्रबंधन को मजबूती मिलेगी, बल्कि जल संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
सरकार का मानना है कि इस पहल से स्थानीय समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और राज्य के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। यह निर्णय उत्तराखंड को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए वैज्ञानिक और संस्थागत रूप से अधिक सक्षम बनाएगा।

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