देहरादून: राजधानी देहरादून में तीन और चार मई को इनलाइन स्केटर हॉकी एसोसिएशन और उत्तराखंड रोलर स्पोर्ट्स एकेडमी के संयुक्त तत्वावधान में 26वीं ओपन स्टेट रोलर स्केटिंग चैंपियनशिप का आयोजन किया गया। परेड मैदान में आयोजित प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। लेकिन प्रतियोगिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि एसोसिएशन इन प्रतियोगिताओं को कराने के लिए अधिकृत ही नहीं है। ऐसे में इसमें हिस्सा लेने वाले छात्र-छात्राओं को इससे कितना लाभ होगा, कह पाना मुश्किल है।
उत्तराखंड रोलर स्केटिंग एसोसिएशन के महासचिव अरविंद कुमार गुप्ता ने जिला खेल अधिकारी को पत्र भेजकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि केवल उत्तराखंड रोलर स्केटिंग एसोसिएशन ही इन आयोजनों के लिए अधिकृत है। वह इसके लिए रोलर स्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया और उत्तराखंड ओलंपिक एसोसिएशन से भी संबद्ध हैं। जबकि जो एसोसिएशन आयोजन कर रही है, वह ना तो ऐसे आयोजनों के लिए अधिकृत है और ना ही संबद्ध है। प्रतियोगिता के प्रमाण पत्र और पुरस्कार की कोई वैद्यता नहीं है। ऐसे में जो सैकड़ों छात्र इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं, उन्हें इससे कोई लाभ नहीं मिलेगा।
दूसरी ओर, जिला खेल कार्यालय ने प्रतियोगिता के आयोजन में अपनी किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है। जिला खेल अधिकारी रविंद्र भंडारी के अनुसार, संभवतः गलती से जिला खेल कार्यालय का नाम समाचारों में प्रकाशित हुआ है, जबकि उन्होंने सिर्फ जगह किराये पर दी है। उन्होंने बताया कि कोई भी आयोजक निर्धारित शुल्क जमा कर जगह किराये पर ले सकता है, जैसे इस आयोजन के आयोजकों ने की है। जगह किराये पर देने के अलावा उनकी कोई भूमिका इस आयोजन में नहीं है।
जिला खेल कार्यालय किसी एसोसिएशन को प्रतियोगिता कराने के लिए कैसे अधिकृत कर सकता है। जिस तरह समाचार पत्रों में खबर छपी है, उससे जिला खेल कार्यालय की भूमिका सवालों के घेरे में है। एक ऐसी एसोसिएशन जो आयोजन के लिए अधिकृत ही नहीं है, वह सैकड़ों छात्र-छात्राओं के साथ खिलवाड़ कर रही है। हम इसके लिए आधिकारिक शिकायत दर्ज करवा रहे हैं।
आयोजकों ने हमसे केवल जगह किराये पर ली है। बाकि इसमें खेल विभाग की कोई भूमिका नहीं है। हमें नहीं पता कि आयोजक किसी एसोसिएशन से अधिकृत हैं या नहीं। जगह किराये पर लेकर कोई भी आयोजन कर सकता है। लेकिन खेल विभाग का नाम इस्तेमाल करना गलत है। अगर शिकायत मिली तो फिर एफिलिएशन को लेकर जांच की जाएगी।

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