हरिद्वार जमीन घोटाले की जांच पूरी, तीन बड़े अधिकारी संदेह के घेरे में, अब सरकार लेगी फैसला
हरिद्वार में नगर निगम पर कूड़े के ढ़ेर के पास स्थित अनुपयुक्त और सस्ती 35 बीघा कृषि भूमि को बिना आवश्यकता 54 करोड़ रुपये में खरीदने का आरोप लगा था।
हरिद्वार में नगर निगम पर कूड़े के ढ़ेर के पास स्थित अनुपयुक्त और सस्ती 35 बीघा कृषि भूमि को बिना आवश्यकता 54 करोड़ रुपये में खरीदने का आरोप लगा था। बताया गया कि उस समय जमीन का लैंड यूज कृषि होने के कारण सर्किल रेट करीब 6,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर था।
कृषि भूमि के रूप में इस भूमि की कुल कीमत करीब 15 करोड़ रुपये होती, लेकिन इसका लैंड यूज व्यावसायिक कराया गया। इसके बाद जमीन को नगर निगम ने खरीद लिया। आरोप था कि जमीन खरीद में न तो नगर निगम अधिनियम का पालन हुआ, न ही शासन के नियमों का। पारदर्शी बोली प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, जो सरकारी खरीद नियमों का खुला उल्लंघन है।
अब तक ये हो चुकी कार्रवाई
जांच अधिकारी नामित करने के बाद इस घोटाले में नगर निगम के प्रभारी सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल, प्रभारी अधिशासी अभियंता आनंद सिंह मिश्रवाण, कर एवं राजस्व अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट व अवर अभियंता दिनेश चंद्र कांडपाल को प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर निलंबित कर दिया गया था। संपत्ति लिपिक वेदवाल का सेवा विस्तार भी समाप्त कर दिया गया था। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें सेवा विस्तार दिया गया था। उनके खिलाफ सिविल सर्विसेज रेगुलेशन के अनुच्छेद 351(ए) के प्रावधानों के तहत अनुशासनिक कार्रवाई के लिए नगर आयुक्त को निर्देश दिए गए थे।

More Stories
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्मृति मेले में उमड़ा जनसैलाब, कोदियाबगड़ में दी गई श्रद्धांजलि
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का ड्रीम प्रोजेक्ट ‘राष्ट्रपति उद्यान’ नवंबर तक होगा तैयार, देहरादून को मिलेगी नई पहचान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गदरपुर में अंतर्राष्ट्रीय क्याकिंग एवं कैनोइंग प्रतियोगिता की तैयारियों का लिया जायजा