देहरादून।
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) एक बार फिर बड़े विवादों के घेरे में है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत हुए एक सनसनीखेज खुलासे में आरोप लगा है कि श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में चढ़ाए गए दान के रुपयों से भाजपा के VIP नेताओं की मेहमाननवाज़ी की गई। मामला सामने आते ही उत्तराखंड की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने सरकार और समिति को आड़े हाथों लिया है, जबकि भाजपा नेताओं ने इसे अपने खिलाफ साजिश बताते हुए जांच की मांग की है।
RTI में क्या हुआ खुलासा?
RTI एक्टिविस्ट और अधिवक्ता विकेश नेगी द्वारा मांगी गई जानकारी में सामने आया है कि केदारनाथ धाम दौरे के दौरान भाजपा नेताओं के भोजन, आवास और अन्य सुविधाओं का भुगतान मंदिर समिति (BKTC) की ओर से किया गया।
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नेहा जोशी (कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की बेटी): केदारनाथ प्रवास के दौरान समिति द्वारा करीब ₹60,000 खर्च करने का दावा।
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आशा नौटियाल (केदारनाथ विधायक): इनके नाम पर लगभग ₹37,500 का खर्च दर्शाया गया है। इसके अलावा कई अन्य नेताओं के नाम भी इस सूची में शामिल हैं।
नेताओं की सफाई: ‘हमने खुद उठाया अपना खर्च, बिल किसने फाड़े?’
RTI में नाम सामने आने के बाद विधायक आशा नौटियाल और भाजपा नेत्री नेहा जोशी ने संयुक्त रूप से बयान जारी कर इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने साफ कहा:
“हमने बाबा केदार के दर्शन पूरी तरह अपने निजी खर्च पर किए थे। बीकेटीसी की तरफ से हमारे लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। हमारे नाम पर ये बिल किसने और क्यों लगाए, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”
विपक्ष हमलावर: ‘श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़’
कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार और BKTC को पूरी तरह कठघरे में खड़ा कर दिया है।
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गणेश गोदियाल (प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस): “यह बेहद शर्मनाक है कि भाजपा नेता श्रद्धालुओं के दान के पैसे पर दर्शन कर रहे हैं। मंदिर समिति को तुरंत इन नेताओं को पत्र भेजकर पैसे की वसूली करनी चाहिए ताकि समिति की छवि सुधरे।”
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गरिमा दसौनी (कांग्रेस प्रवक्ता): “BKTC कभी क्यूआर कोड, कभी सोना विवाद, तो कभी भाई-भतीजावाद को लेकर विवादों में रहती है। अब नेताओं के नाम पर ये ‘बिलबाज़ी’ उत्तराखंड की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। इसकी उच्चस्तरीय जांच हो।”
BJP और BKTC ने दिए जांच के आदेश
मामले के तूल पकड़ते ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि पार्टी पारदर्शी जांच के पक्ष में है। यह पता लगाया जाना जरूरी है कि सामने आए बिल असली हैं या फर्जी और यह गड़बड़ी किस स्तर पर हुई है।
उधर, BKTC के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी संबंधित फाइलें तलब कर ली हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया:
“सोशल मीडिया और RTI के माध्यम से जो तथ्य सामने आए हैं, उनकी जांच की जा रही है। यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या फर्जीवाड़ा मिलता है, तो दोषी अधिकारी या कर्मचारी को बिल्कुल बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसका ट्रांसफर ही क्यों न हो चुका हो।”

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