July 2, 2026

नरेंद्र नगर निकाय चुनाव: भाजपा के राजेंद्र विक्रम सिंह निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए, सभासद वार्डों में भी BJP का दबदबा

Share now

नरेंद्र नगर पालिका चुनाव परिणाम: भाजपा के राजेंद्र विक्रम सिंह पंवार निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित; सभासद सीटों पर फिर पुराना इतिहास दोहराया

नरेंद्र नगर (टिहरी गढ़वाल): नगर पालिका परिषद नरेंद्र नगर के स्थानीय निकाय चुनाव के परिणाम घोषित हो चुके हैं। गुरुवार (11 जून) को कड़ी सुरक्षा के बीच हुई मतगणना के बाद स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है।

अध्यक्ष पद पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशी और पूर्व पालिका अध्यक्ष राजेंद्र विक्रम सिंह पंवार को निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया है, क्योंकि कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन पत्र पहले ही खारिज हो गया था। वहीं, सभासद के 7 वार्डों में से भाजपा ने 4 और कांग्रेस ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की है।

 वार्ड वाइज चुनाव परिणाम (किस वार्ड से कौन जीता?):

शहीद भगत सिंह नेगी राजकीय इंटर कॉलेज में हुई मतगणना के बाद सहायक रिटर्निग ऑफिसर नीरज कुमार ने सभी 7 वार्डों के आधिकारिक नतीजे जारी किए:

वार्ड नंबर विजेता प्रत्याशी पार्टी समर्थन प्राप्त मत निकटतम प्रतिद्वंदी (पार्टी)
वार्ड 1 ममता देवी BJP 249 रजनी (कांग्रेस – 90 मत)
वार्ड 2 आभा पंवार Congress 148 प्रकाश रमोला (BJP – 137 मत)
वार्ड 3 सचिन भंडारी BJP 211 अरविंद रावत (निर्दलीय/कांग्रेस – 143 मत)
वार्ड 4 रवि नेगी Congress 184 शैल गुसाईं (BJP – 159 मत)
वार्ड 5 पुष्पा राणा BJP 176 रजनी (कांग्रेस – 59 मत)
वार्ड 6 रेखा आर्या Congress 103 भाजपा उम्मीदवार (96 मत)
वार्ड 7 साकेत बिजल्वाण BJP 169 जितेंद्र चांदपुरी (कांग्रेस – 56 मत)

नोट: इस चुनाव में कुल 8 मतदाताओं ने नोटा (NOTA) का प्रयोग किया। वार्ड नंबर 7 से जीतने वाले साकेत बिजल्वाण भाजपा के मंडल अध्यक्ष हैं और वह लगातार दूसरी बार सभासद चुने गए हैं।

 सीटों का समीकरण: नहीं हुआ कोई नफा-नुकसान

नरेंद्र नगर पालिका के इस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही सीटों के लिहाज से कोई बड़ा फायदा या नुकसान नहीं हुआ है। पिछले चुनाव में भी भाजपा के 4 और कांग्रेस के 3 सभासदों ने जीत दर्ज की थी, और इस बार भी वही पुराना इतिहास दोहराया गया है।

 नरेंद्र नगर में क्यों देरी से हुआ चुनाव?

आमतौर पर अन्य निकायों के साथ होने वाला यह चुनाव यहां देरी से संपन्न हुआ। इसके पीछे दो मुख्य कारण और राजनीति सामने आई है:

  • परिसीमन का विवाद: पूर्व में पालिका क्षेत्र के नए परिसीमन के तहत कुंजापुरी के पास स्थित बडेड़ा गांव को पालिका में शामिल करने का प्रस्ताव था। लेकिन ग्रामीणों के भारी विरोध और शिकायत के चलते यह गांव शामिल नहीं हो सका, जिससे अधिसूचना में देरी हुई।

  • विपक्ष के आरोप: दूसरी तरफ, विपक्ष का आरोप है कि भाजपा के पास इस सीट पर कोई मजबूत चेहरा नहीं था और यह सीट पहले आरक्षित श्रेणी में आ रही थी। विपक्ष के अनुसार, जानबूझकर चुनाव को टाला गया ताकि बाद में नियमों के तहत सीट को सामान्य (General) कराया जा सके।