आपदा के एक साल बाद भी नहीं बने पैदल मार्ग, सड़क बंद होने से आठ हजार की आबादी प्रभावित
चमोली। उत्तराखंड राज्य गठन के 26 वर्ष पूरे होने के बावजूद सीमांत क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव आज भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। चमोली जिले से सामने आई तस्वीरें विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। कहीं स्कूली बच्चे और ग्रामीण उफनाते गदेरे को जान जोखिम में डालकर पार करने को मजबूर हैं, तो कहीं सड़क बंद होने के कारण लोगों को पोकलैंड मशीन की बकेट में बैठकर सफर करना पड़ रहा है।
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एक साल बाद भी नहीं बने आपदा में बहे पैदल मार्ग
नंदानगर (घाट) क्षेत्र में सितंबर 2025 की आपदा में बह गए पैदल मार्गों का आज तक पुनर्निर्माण नहीं हो सका है। परिणामस्वरूप कई गांवों के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए मौख गाड़ पार कर आवाजाही करनी पड़ रही है। बरसात के दौरान गदेरे का जलस्तर बढ़ने से स्थिति और अधिक खतरनाक हो गई है।
सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को झेलनी पड़ रही है। कई अभिभावक अपने छोटे बच्चों को पीठ पर बैठाकर उफनते गदेरे को पार कर स्कूल पहुंचाने को विवश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हर दिन दुर्घटना का खतरा बना रहता है, लेकिन मजबूरी में इसी रास्ते का उपयोग करना पड़ रहा है।
प्रशासन से कई बार लगाई गुहार
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पैदल पुल और क्षतिग्रस्त मार्गों के पुनर्निर्माण की मांग कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों से की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बरसात के मौसम में यदि कोई बीमार पड़ जाए तो उसे अस्पताल तक पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बन जाता है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
पोकलैंड मशीन की बकेट से पार कर रहे सड़क
जिले के देवाल–वाण मोटर मार्ग पर गामरी गाड़ के समीप सक्रिय भूस्खलन क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण भारी मात्रा में मलबा, बोल्डर और दलदल सड़क पर आ गया है। इससे सड़क पूरी तरह बंद हो गई है और वाहनों की आवाजाही ठप हो गई है।
ऐसे में ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर पोकलैंड मशीन की बकेट में बैठकर सड़क पार करने को मजबूर हैं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने क्षेत्र की बदहाल स्थिति को उजागर कर दिया है।
आठ हजार लोगों का संपर्क प्रभावित
देवाल–वाण मोटर मार्ग बंद होने से गामरी गाड़ से आगे बसे गांवों की लगभग आठ हजार आबादी प्रभावित हुई है। लोगों को इलाज, राशन, बाजार और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए देवाल पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मानसून के दौरान संवेदनशील मार्गों पर स्थायी सुरक्षा कार्य कर सड़क को शीघ्र सुचारु किया जाए, ताकि लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर सफर न करना पड़े। सीमांत क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की कमी आज भी ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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