INS महेंद्रगिरी और INS मालवन से समुद्री सुरक्षा होगी और मजबूत, आधुनिक हथियारों व तकनीक से होंगे लैस
अमरावती। भारतीय नौसेना की समुद्री शक्ति को और मजबूती देने के लिए जल्द ही दो अत्याधुनिक युद्धपोत आईएनएस महेंद्रगिरी (INS Mahendragiri) और आईएनएस मालवन (INS Malvan) नौसेना के बेड़े में शामिल किए जाएंगे। इन दोनों स्वदेशी युद्धपोतों के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक क्षमता और तटीय सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में एक साथ तीन युद्धपोतों को भारतीय नौसेना को समर्पित किया था। अब नौसेना अगले चरण में आईएनएस महेंद्रगिरी और आईएनएस मालवन को भी जल्द कमीशन करने की तैयारी में है। पहले इनकी कमीशनिंग की तिथि तय की गई थी, लेकिन तकनीकी कारणों से इसे स्थगित कर दिया गया। अब संभावना है कि दोनों युद्धपोत इसी महीने भारतीय नौसेना के बेड़े का हिस्सा बन जाएंगे।

INS मालवन: पनडुब्बी रोधी अभियान का मजबूत हथियार
आईएनएस मालवन एक एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) है, जिसे कोचीन शिपयार्ड में तैयार किया गया है। भारतीय नौसेना ने वर्ष 2019 में इसका निर्माण आदेश दिया था। 30 नवंबर 2023 को इसे लॉन्च किया गया और 31 मार्च 2026 को नौसेना को सौंप दिया गया।
यह युद्धपोत विशेष रूप से उथले समुद्री क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है।
मुख्य विशेषताएं:
- अधिकतम गति: 25 नॉट
- ट्रिपल-जेट वॉटर प्रोपल्शन सिस्टम
- आधुनिक रडार एवं हल-माउंटेड सोनार
- हल्के टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट
- लंबाई: 80 मीटर
- चौड़ाई: 11.36 मीटर
- विस्थापन क्षमता: लगभग 1,100 टन
INS महेंद्रगिरी: आधुनिक हथियारों से लैस स्टील्थ फ्रिगेट
आईएनएस महेंद्रगिरी भारतीय नौसेना की नीलगिरी श्रेणी (Nilgiri Class) का अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट है, जिसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में किया गया है। इसका निर्माण कार्य जून 2022 में शुरू हुआ था और सितंबर 2023 में इसे लॉन्च किया गया। अप्रैल 2026 में इसे भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया।
यह युद्धपोत अत्याधुनिक हथियारों, रडार और सोनार प्रणालियों से लैस है तथा समुद्र में दुश्मन के युद्धपोतों और पनडुब्बियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में सक्षम है।
मुख्य विशेषताएं:
- अधिकतम गति: 28 नॉट
- ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल
- 76 मिमी नौसैनिक तोप
- वरुणास्त्र टॉरपीडो प्रणाली
- रॉकेट लॉन्चर
- दो ध्रुव या सी किंग हेलीकॉप्टर संचालन की क्षमता
- आधुनिक स्टील्थ तकनीक, रडार और सोनार सिस्टम
- लंबाई: 149 मीटर
- चौड़ाई: 17.8 मीटर
- विस्थापन क्षमता: लगभग 6,670 टन
समुद्री सुरक्षा को मिलेगा नया आयाम
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इन दोनों युद्धपोतों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी, पनडुब्बी रोधी क्षमता और सामरिक शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच ये युद्धपोत भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाएंगे तथा देश की रक्षा तैयारियों को नई मजबूती प्रदान करेंगे।

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