May 24, 2026

15 सितंबर तक ‘रीड ओनली मोड’ में रहेगी वोटर लिस्ट, जानें क्या पड़ेगा असर

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देहरादून। उत्तराखंड में चुनाव आयोग ने एक बड़ा फैसला लेते हुए प्रदेश की मतदाता सूची (Voter List) को पूरी तरह से फ्रीज कर दिया है। राज्य में शुरू होने जा रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। अब 15 सितंबर 2026 तक मतदाता सूची में न तो कोई नया नाम जोड़ा जाएगा और न ही किसी पुराने नाम को हटाया जाएगा।

हालांकि, इस अवधि के दौरान नए वोटर बनने के लिए आवेदन जमा किए जा सकेंगे, लेकिन उन पर कोई भी प्रशासनिक कार्रवाई 15 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद ही शुरू होगी।

29 मई से शुरू होगा महाअभियान

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में 29 मई से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की शुरुआत होने जा रही है। इसका शेड्यूल इस प्रकार है:

7 जून तक: जिला स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

8 जून से 7 जुलाई तक: बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर गणना प्रपत्र भरवाने का काम करेंगे।

‘रीड ओनली मोड’ में रहेगा डेटा

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के दौरान पूरी मतदाता सूची केवल “रीड ओनली मोड” में रहेगी। इसका मतलब यह है कि मौजूदा डेटा में तत्काल कोई भी बदलाव या संशोधन संभव नहीं होगा। 15 सितंबर को जब फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी, उसके बाद ही सभी लंबित आवेदनों का निस्तारण किया जाएगा।

15 सितंबर तक किन सेवाओं पर पड़ेगा असर?

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान आम जनता के लिए निम्नलिखित कार्य अस्थायी रूप से प्रभावित रहेंगे:

नामों में बदलाव: नए वोटर आईडी कार्ड बनाने, नाम कटवाने या किसी भी तरह के संशोधन की प्रक्रिया पूरी तरह रुकी रहेगी।

कार्ड प्रिंटिंग: नए वोटर आईडी कार्ड की प्रिंटिंग और उनकी डिलीवरी अस्थाई रूप से बंद रहेगी।

आवेदनों पर रोक: बीएलओ (BLO) और ईआरओ (ERO) स्तर पर किसी भी आवेदन को न तो स्वीकार किया जाएगा और न ही निरस्त (Reject) किया जाएगा।

पता परिवर्तन: एक विधानसभा क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में वोटर आईडी ट्रांसफर या पता बदलवाने का काम भी फिलहाल नहीं हो सकेगा।

क्या है इस अभियान का उद्देश्य? > चुनाव आयोग का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध, सटीक और पारदर्शी बनाना है। इसके जरिए सूची में मौजूद डुप्लीकेट (एक से अधिक जगह दर्ज), मृत और स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नाम हटाए जाएंगे, ताकि भविष्य के चुनावों के लिए एक साफ-सुथरी वोटर लिस्ट तैयार की जा सके।